इस लेख में मैं समझाऊंगा कि हाई-स्पीड बुलेट ट्रेन इतनी तेज़ कैसे चलती हैं (Bullet train fast kaise chalti hai) और इनका वर्किंग मैकेनिज्म (working mechanism) क्या है। बुलेट ट्रेन जैसी हाई-स्पीड ट्रेनें पारंपरिक ट्रेनों (conventional trains) की तुलना में बहुत अधिक गति से दौड़ सकती हैं।
Bullet train की इस रफ़्तार के पीछे इनके विशेष रूप से डिज़ाइन किए गए Tilting Coaches, Tunnels, Dedicated Tracks और VVVF Drives का हाथ होता है। इस इलेक्ट्रिक बुलेट ट्रेन में एक खास तरह का Pantograph, Rolling Stocks और Aerodynamic Design वाली बॉडी होती है।

अगर आपके मन में ये सवाल हैं:
- इसे Bullet train क्यों कहा जाता है?
- यह पहियों (wheels) पर चलती है या चुंबक (magnet) पर?
- क्या मुड़ते समय बुलेट ट्रेन झुकती (tilt) है?
- बुलेट ट्रेन के आगे का हिस्सा बहुत लंबा (nose shape) क्यों होता है?
- ट्रेन में इलेक्ट्रिक इंजन कहाँ होता है?
- ट्रेन में AC सप्लाई, पावर मोटर्स और स्पीड की क्या व्यवस्था है?
तो इस Post को आगे पढ़ना जारी रखें।
The table of contents of this post
इस ट्रेन को पहले ‘बुलेट ट्रेन’ कहा जाता था, क्योंकि इसका अग्र भाग (Front portion) बुलेट के आकार का है।
Bullet Train कैसे काम करती है | इतनी Fast कैसे चलती है?
भारत में आने वाली हाई-स्पीड बुलेट ट्रेनें अपनी विशेष डिजाइनों के कारण इतनी तेज़ चल सकती हैं। इसमें विशेष रूप से डिज़ाइन की गई रेल (rail) और dedicated डिज़ाइन की गई सुरंगें (dedicated tunnels) होती हैं। इसमें विशेष रूप से डिज़ाइन किया गया पैंटोग्राफ (pantograph), aerodynamic design, tilting body, distributed engines और advanced controls आदि भी शामिल हैं।
हालाँकि, इन विशेष उपकरणों (special equipment) की स्थापना से इसकी स्थापना लागत (installation cost) बढ़ जाती है। लेकिन, यह कम लागत पर बड़े पैमाने पर यात्री परिवहन (mass passenger transport) का एक बहुत ही सुविधाजनक तरीका है।
Distributed Engine सिस्टम in Bullet Train
सामान्य ट्रेनों में एक मुख्य इंजन होता है जो कई पैसेंजर डिब्बों (compartments) को खींचता है।
लेकिन मेट्रो या बुलेट ट्रेन जैसी हाई-स्पीड ट्रेनों में Distributed Engine System का उपयोग होता है। इसमें इंजन के पार्ट्स अलग-अलग कोच या डिब्बों में बटे होते हैं। ट्रेन के दोनों सिरों पर केवल ड्राइवर कंट्रोल केबिन (Driver-control cabins) होते हैं।
इसलिए इसमें कोई अलग से दिखने वाला भारी इंजन नहीं होता। इसलिए इंजन दिखाई नहीं देता और हम इसे ‘इंजन-रहित’ (Engine-less) ट्रेन कहते हैं। लेकिन, वास्तविकता यह है कि कोई भी ट्रेन बिना इंजन के नहीं चल सकती।
चित्र-1 में ड्राइवर केबिन “D” को दोनों सिरों पर दिखाया गया है। पैसेंजर कंपार्टमेंट के कुछ हिस्से पूरी तरह से सील (sealed) होते हैं, जिनमें इंजन के ये कलपुर्जे छिपे होते हैं।

जब हम ऐसी ट्रेनों में यात्रा करते हैं, तो हम पाते हैं कि यात्री डिब्बे के कुछ हिस्से पूरी तरह से सील (sealed) होते हैं। और वहां कुछ भी दिखाई नहीं देता। यदि आपने ध्यान नहीं दिया है, तो अगली यात्रा के दौरान इसे ध्यान से देखें।
यात्री डिब्बे के ये छिपे हुए हिस्से (concealed portions) इंजन के पुर्जों को समाहित करते हैं।
Bullet trains wheels पर चलती है, Magnet पर नहीं
अक्सर बुलेट ट्रेन के पहिये दिखाई नहीं देते, जिससे लोगों को लगता है कि यह मैग्नेट (magnetic force) पर चलती है। लेकिन सभी हाई-स्पीड ट्रेनों में पहिये होते हैं जो रेल (rails) पर चलते हैं।
इन पहियों को Cover से ढका जाता है (चित्र-2 Green color देखें ) ताकि वे दिखाई न दें ।यह cover पहियों को ढक लेता है जिससे वे लगभग अदृश्य हो जाते हैं।

मैग्नेट पर चलने वाली ट्रेन को Maglev Train (Magnetic Levitation) कहा जाता है, जो फिलहाल बहुत कम और कम दूरी के लिए इस्तेमाल होती हैं। Maglev शब्द Magnetic Levitation से लिया गया है।
वर्तमान में, Maglev ट्रेनें बहुत कम हैं। साथ ही, वर्तमान में मैग्लेव प्रकार की ट्रेनें केवल बहुत कम दूरी की यात्रा (जैसे शहर से हवाई अड्डे तक कुछ 10 किमी तक) के लिए ही संचालित होती हैं।
Loud Sound और Tunnel Boom Problem
जब बुलेट ट्रेन बहुत तेज़ गति से सुरंग (tunnel) में प्रवेश करती है, तो एक बहुत तेज़ धमाके जैसी आवाज़ आती है जिसे Tunnel Boom कहते हैं।
Tunnel boom और loud sounds हाई-स्पीड ट्रेनों की सबसे गंभीर समस्याओं में से एक है।
चित्र 2 (Figure 2) को फिर से देखें। ट्रेन के अगले हिस्से का आकार एक विशेष प्रकार का लंबा आकार है। इस लंबे आकार को हम ट्रेन की Nose या नाक कहते हैं।
बुलेट ट्रेन की लंबी नाक (Long Nose) इसी Tunnel boom की समस्या को कम करने के लिए डिज़ाइन की गई है। भारत आने वाली E5 series Shinkansen बुलेट ट्रेन की नाक की लंबाई लगभग 15 मीटर है।
What is a Tunnel boom? क्या है
चित्र 3a (Figure 3a) को देखें। मैंने इस diagram में एक सुरंग दिखाई है। ट्रेन के रास्ते में ऐसी कई सुरंगें होंगी। जब भी ट्रेन उच्च गति से इस सुरंग में प्रवेश करती है, तो ‘टनल बूम’ (tunnel boom) की समस्या उत्पन्न होती है।

अब चित्र 3b (Figure 3b) को देखें। यह ट्रेन के अगले हिस्से को सपाट (flat) दिखाता है (बिना उस ‘नोज़’ के जो सामान्य ट्रेनों में होती है)।

जब ट्रेन का फ्लैट हिस्सा टनल में घुसता है, तो वह अंदर की हवा पर पिस्टन की तरह भारी दबाव (pressure) डालता है। यह प्रेशर वेव (pressure wave) ध्वनि की गति से चलती है और टनल के दूसरे छोर से तेज़ धमाके के साथ बाहर निकलती है। लंबी नाक इस दबाव को कम कर देती है
आगे, चित्र 3c (Figure 3c) के अनुसार, यह एक ‘पिस्टन प्रभाव’ (Piston effect) की तरह काम करता है। एक पिस्टन में, अगले हिस्से (front side) में हवा का दबाव उच्च (high air pressure) होता है, और पिछले हिस्से (back side) में हवा का दबाव कम (low air pressure) होता है।

सुरंग के अंदर का यह वायु दबाव एक pressure wave बनाता है। ये लहरें ध्वनि की गति (speed of sound) से चलती हैं। और जब यह संकुचित हवा या लहर सुरंग के अगले छोर से बाहर निकलती है, तो एक बहुत तेज़ आवाज़ सुनाई देती है। हम इस तेज़ आवाज़ को ‘टनल बूम’ (tunnel boom) कहते हैं।
इस प्रकार की ध्वनि सुपरसोनिक विमानों (supersonic planes) से आने वाली आवाज़ के समान होती है, लेकिन यह कम स्तर (low-level) की होती है, या जैसे राइफल से निकलने वाली गोली की आवाज़। यह एक बहुत ही Low-frequency वाली ध्वनि है।
सामने की लंबी नाक या Long Nose इस समस्या को कम करता है, क्योंकि सामने का कम क्षेत्रफल (area) कम दबाव पैदा करता है।
यह ध्वनि ट्रेन की बॉडी और सुरंग के व्यास (diameter) के बीच के गैप (gap) पर भी निर्भर करती है। यदि गैप कम होगा, तो ध्वनि अधिक होगी। इसलिए, टनल बूम की समस्या को कम करने के लिए सुरंग का आकार पर्याप्त बड़ा होना चाहिए।
ऐसा तब होता है जब हाई-स्पीड बुलेट ट्रेनें सुरंग में प्रवेश करती हैं। आप सभी ने सामान्य ट्रेनों के सुरंगों से गुजरते समय भी कुछ आवाज़ महसूस की होगी।
Tunnel boom characteristics
The tunnel boom has the following characteristics:
- जब बुलेट ट्रेन टनल (सुरंग) में प्रवेश करती है, तब ‘टनल बूम’ (Tunnel Boom) की घटना घटित होती है।”
- टनल के भीतर वायु दाब (Air pressure) के कारण एक अत्यंत तीव्र और तीक्ष्ण ध्वनि (Sharp sound) उत्पन्न होती है।
- यह ध्वनि पराध्वनिक विमानों (Supersonic crafts) या तोप के दागने (Cannon shots) से उत्पन्न होने वाले शोर के समान होती है।
- यदि टनल और ट्रेन की बॉडी (ढांचे) के बीच का अंतराल (Gap) कम होता है, तो ध्वनि की तीव्रता और अधिक बढ़ जाती है।
- This problem is proportional to the V3 – where V is the velocity of the train
- पहाड़ों और घाटियों में यह समस्या और भी गंभीर हो जाती है क्योंकि वहाँ ध्वनि की प्रतिध्वनि (Echo) उत्पन्न हो सकती है।
- बुलेट ट्रेनों सहित सभी हाई-स्पीड ट्रेनों में यह सबसे गंभीर समस्याओं में से एक है।
The problems due to the tunnel boom sound
इस टनल बूम (tunnel boom) ध्वनि के कारण निम्नलिखित समस्याएँ होती हैं:
- यह ध्वनि स्थानीय निवासियों (Local residents) के लिए अत्यधिक ध्वनिक अशांति (Acoustic disturbance) और व्यवधान का कारण बनती है।”
- यह ध्वनि निकटवर्ती वन्यजीवों और पशु-पक्षियों के लिए अत्यधिक ध्वनिक अशांति (Acoustic disturbance) और व्याकुलता उत्पन्न करती है।
- अत्यधिक वायु दबाव (air pressure) के कारण सुरंग की दीवारों और प्रवेश द्वारों में दरारें आ सकती हैं।
- Passenger Discomfort: अचानक दबाव परिवर्तन के कारण यात्रियों के कानों में ‘पॉपिंग’ (popping) या दर्द महसूस हो सकता है।
- Impact on Stability
The advantages of the long nose in high-speed trains
हाई-स्पीड बुलेट ट्रेनों के सामने वाले ‘लॉन्ग नोज़’ (Long nose) डिज़ाइन के निम्नलिखित लाभ हैं::
- सुरंग सोनिक बूम (Tunnel Sonic Boom) को रोकना
- तेज आवाज को कम करना
- सुरंग में असमान air pressure कम करना
- हवाओं के प्रभाव को कम करना
- ऊर्जा की बचत
- यह डिज़ाइन हवा को आसानी से काटने में मदद करता है, जिससे हवा का प्रतिरोध कम हो जाता है और ट्रेन उच्च गति प्राप्त कर सकती है।
- स्थिरता (Stability): उच्च गति पर हवा के थपेड़ों से ट्रेन को हिलने से बचाने के लिए यह सुव्यवस्थित (streamlined) आकार स्थिरता प्रदान करता है।
The tunnel design
जब एक हाई-स्पीड ट्रेन सुरंग में प्रवेश करती है, तो ‘टनल बूम’ (tunnel boom) के अलावा इसमें ध्वनि की कुछ अन्य समस्याएँ भी होती हैं।
पूरी यात्रा के दौरान पैंटोग्राफ (pantograph) के कारण भी तेज़ आवाज़ होती है।
हाई-स्पीड ट्रेनों में शोर की समस्या को हल करने के लिए हम निम्नलिखित उपाय करते हैं:
- सुरंग के प्रवेश द्वार पर हुड लगाना
- सुरंग में छेद वाली दीवारें जोड़ना
- सुरंग में वेंट छेद प्रदान करना
- पैंटोग्राफ कवर (Pantograph Covers/Shields)
- Low-noise Pantograph Design
- Sound absorbing panels
हाई-स्पीड ट्रेनों में शोर की समस्या को हल करने के लिए हम निम्नलिखित उपाय करते हैं:
- ट्रेन के सामने एक लंबी और संकीर्ण नाक (Long narrow nose) प्रदान करना: यह हवा को सुचारू रूप से काटती है और दबाव की लहरों (pressure waves) को कम करती है।
- सुरंगों का उचित डिज़ाइन (Proper design of tunnel): सुरंगों के प्रवेश द्वार पर विशेष ‘हुड’ (hoods) या छिद्रित (perforated) दीवारें बनाई जाती हैं ताकि हवा का दबाव अचानक न बढ़े।
- पैंटोग्राफ का उचित डिज़ाइन (Properly design pantograph): पैंटोग्राफ भी तेज़ आवाज़ पैदा करता है, इसलिए इसे एरोडायनामिक आकार दिया जाता है और इसके चारों ओर शोर सोखने वाले कवर (covers) लगाए जाते हैं।
ये इंजीनियरिंग सॉल्यूशन हाई-स्पीड रेल में शोर कम करने के लिए ज़रूरी हैं। जब ट्रेन 320 km/h की रफ़्तार से चलती है, तो हवा लगभग एक ठोस चीज़ की तरह बर्ताव करती है, और फ्रिक्शन से बहुत ज़्यादा अकूस्टिक एनर्जी बनती है।
The rails design
चित्र 4a (Figure 4a) को देखें: ऊपर वाला रेल डिज़ाइन सामान्य ट्रेनों के लिए है। इसमें दो रेल के जोड़ों (joints) के बीच कुछ गैप (gap) होता है।
हालाँकि, हाई-स्पीड ट्रेन रेल के मामले में रेल के जोड़ों के बीच कोई गैप नहीं होता है। चित्र 4a में रेल की निचली जोड़ी (bottom pair) को देखें।

कुछ मामलों में, वेल्डिंग (welding) नहीं होगी। जैसा कि नीचे वाली रेल जोड़ी के दाईं ओर (right side) दिखाया गया है, जोड़ एक कोण (angle) पर होगा। चित्र 4b (Figure 4b) को देखें।

High-speed bullet trains are tilting trains
जब भी हम किसी वाहन में यात्रा करते हैं, तो वाहन मोड़ लेता है। तब सभी यात्री बाहर की ओर एक centrifugal force महसूस करेंगे। यदि वाहन बाईं ओर मुड़ रहा है, तो हम दाईं ओर झुक जाते हैं। चित्र 5a (Figure 5a) को देखें।

हाई-स्पीड बुलेट ट्रेन में यह समस्या अधिक होती है, क्योंकि यह बहुत तेज़ी से मुड़ती है।
जब भी हम ऊँची गति पर साइकिल चलाते समय उसे तेज़ी से बाईं ओर (left) मोड़ते हैं, तो संतुलन बनाए रखने के लिए हम अपनी साइकिल को भी बाईं ओर झुकाते हैं।
ठीक वैसा ही बुलेट ट्रेन या टिल्टिंग ट्रेन (tilting train) में भी होता है। यह झुकाव (tilt) सामान्य ट्रेनों में नहीं होता है।
एक टिल्टिंग ट्रेन (tilting train) में, सुरक्षा के लिए बोगी को पटरियों पर सपाट और स्थिर रहना चाहिए, जबकि कार बॉडी (जहाँ यात्री बैठते हैं) अपकेंद्री बलों (centrifugal forces) को प्रबंधित करने के लिए झुक (tilt) जाती है।
अब चित्र 5b (Figure 5b) को देखें। जब भी ट्रेन तेज़ गति से मोड़ लेती है, तो उसकी बॉडी (body) थोड़ी झुक जाती है, जैसा कि चित्र में दिखाया गया है।
केवल कार बॉडी (car body) ही झुकेगी। बोगी वाला हिस्सा (डिब्बे का निचला हिस्सा) समतल (flat) ही रहेगा। यह चित्र 5b में भाग A और भाग B की लंबाई बदलकर किया जाता है।

जैसा कि दिखाया गया है, जाँच करें कि 2 सहायक सस्पेंशन (supporting suspensions) की ऊँचाई अलग-अलग हो गई है। चित्र 5b (Figure 5b) के अनुसार हिस्सा “B” हिस्सा “A” से लंबा है।
यह जटिल नियंत्रण प्रणाली (complex control system) द्वारा किया जाता है। कंट्रोल सिस्टम, गति और मोड़ने के कोण (turning angle) आदि के आधार पर हिस्सा ‘A’ और हिस्सा ‘B’ के बीच के अंतर को निर्धारित करता है।
उपरोक्त नियंत्रण के साथ ट्रेन उच्च गति पर मोड़ ले सकती है। चूंकि मुड़ते समय ट्रेन झुक जाती है, इसलिए इसे ‘टिल्टिंग ट्रेन’ (Tilting train) कहा जाता है।
मुड़ते समय ट्रेन झुक (tilt) जाती है, इसलिए हम इसे ‘टिल्टिंग ट्रेन’ (Tilting Train) कहते हैं।
Active suspension in high-speed bullet trains
प्रत्येक गतिशील वाहन में कंपन (vibrations) को सोखने के लिए शॉक एब्जॉर्बर (Shock absorbers) होते हैं। यह वाहन के सस्पेंशन सिस्टम (Suspension system) का ही एक हिस्सा है।
चूंकि बुलेट ट्रेन बहुत तेज़ गति से चलती है, इसलिए इसमें कंपन भी अधिक होता है। इससे यात्रियों को असुविधा और परेशानी हो सकती है।
चित्र 6 (Figure 6) को देखें। ट्रेन के डिब्बे (compartment) में भी एक सस्पेंशन सिस्टम होता है। (चित्र में केवल 2 नंबर/इकाइयां दिखाई गई हैं)।

बुलेट ट्रेनों के सस्पेंशन सिस्टम में सस्पेंशन स्प्रिंग के टेंशन (tension) को नियंत्रित करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल होता है। इसलिए इसे ‘एक्टिव सस्पेंशन सिस्टम’ (Active Suspension System) कहा जाता है। सामान्य ट्रेनों में यह टेंशन फिक्स (fixed) होता है।
अब चित्र 7 (Figure 7) को देखें। इसमें ‘वाइब्रेशन सेंसर्स’ (Vibration sensors) लगे होते हैं। ये सेंसर कंपन आदि को महसूस करते हैं और सस्पेंशन स्प्रिंग के टेंशन को नियंत्रित करते हैं।
इस तरह, ट्रेन की सभी गतियों (speeds) पर कंपन कम बना रहता है।और कम कंपन यात्रियों के लिए आरामदायक होता है।

यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण तकनीकी बिंदु है। ‘एक्टिव कंट्रोल’ (Active Control) ही वह तकनीक है जो बुलेट ट्रेन के सफर को इतना स्थिर और सुगम बनाती है।
The variable voltage variable frequency control (VVVF)
चित्र 8 (Figure 8) को देखें। यह हाई-स्पीड बुलेट ट्रेनों की ‘वैरिएबल वोल्टेज वैरिएबल फ्रीक्वेंसी’ (VVVF) कंट्रोल सिस्टम को दर्शाता है। 25 kV के उच्च इनपुट वोल्टेज को कम करने के लिए एक इलेक्ट्रिक ट्रांसफार्मर (Electrical Transformer) का उपयोग किया जाता है।

इसके बाद, एक PWM कन्वर्टर इस AC को DC में बदलता है। आगे, IGBT-आधारित इन्वर्टर (IGBT-based inverter) इस DC को वांछित फ्रीक्वेंसी और वोल्टेज के AC में परिवर्तित करता है।
इस इलेक्ट्रिक इंजन में उपयोग किया जाने वाला मोटर specially designed traction Induction Motor है। इलेक्ट्रिक ट्रेन के इंजन में, इनवर्टर के आउटपुट से कुछ इंडक्शन मोटर्स जुड़े होते हैं। चूंकि मोटर की संख्या अधिक होती है, इसलिए इसमें कई इनवर्टर भी लगे होते हैं।
वास्तव में, प्रत्येक इलेक्ट्रिक ट्रेन में कम से कम दो ‘कंट्रोल और ड्राइव सिस्टम’ (Control and Drive Systems) होते हैं। इस तरह, यदि एक सिस्टम में कोई समस्या आती है, तो दूसरा सिस्टम ट्रेन को अगले स्टेशन तक पहुँचाने में सक्षम होता है।
India bullet train details – motors, hp power, speed, etc
The specification of the high-speed bullet trains in India is as follows
भारत की हाई-स्पीड बुलेट ट्रेनों के विनिर्देश (Specifications) निम्नलिखित हैं:
- Technology E5 series Shinkansen
- Electrical AC supply 25KV
- Each motor 300 kW traction induction motor
- Total power of train engine 9600 kW (12870 hp)
- As per the calculation, there may be 32 motors, distributed in many coaches
- 10 coaches (may increase in the future)
- Standard gauge 1435mm (of rail)
- Car body – aluminum alloys
- Speed about 320 km/hour
- It will take about 320 seconds and a distance covered of about 18 km to achieve the full speed of the train
- Regenerative braking system
आशा है कि आपको “हाई-स्पीड बुलेट ट्रेन कैसे काम करती है” पर यह जानकारी पसंद आई होगी।
Further, to learn more about the topic, watch a video of a high-speed train
अन्य लेख भी पढ़ें:
Watch the tunnel boom video
Also, read Why an AC motor is used in the train
Also read Why neutral in induction motor in VVVF in train engine
Further, read what is a potential transformer
Also, read the difference between neutral and earth wire
Further, read how to remove electrical noise.
I hope that you enjoyed the article on how the high-speed Bullet train works.
About the author – G K Agrawal, Retd. Sr. DGM, BHEL is an Electrical & Electronics engineering professional with extensive industry and R&D experience, sharing practical engineering insights through this technical blog and YouTube. Read about me here.


